शनिवार, 11 मई 2013

कुच्छ तो शर्म करो

पत्रकारिता बहुत ही सम्मानित और प्रतिष्ठा परक कार्य है। पत्रकार समाज के लिए एक आईना होता है। इसका समाज मे गहरी पैठ होता है। समाज का हर व्यक्ति पत्रकारों से काफी उम्मीद रखता है। पत्रकार रुपी दर्प ही जब कुरुप हो जाए तो उसमे दिखने वाला समाज का चेहरा कितना भयावह हो जाए गा इसका अन्दाजा स्वतः ही लगाया जा सकता है।
आज पत्रकारिता एक व्यवसाय के रुप फल फूल रहा है। जिन्हे कलम का सिपाही कहा जाता रहा है आज वही उसको बेचने में लगे हुए है लेकिन इस मर्यादित पेशे को बाजारू बना पाना उनके बस का  नहीं है. 

1 टिप्पणियाँ:

यहां 17 मार्च 2014 को 7:02 pm बजे, Blogger khanshaukat ने कहा…

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