कुच्छ तो शर्म करो
पत्रकारिता बहुत ही सम्मानित और प्रतिष्ठा परक कार्य है। पत्रकार समाज के लिए एक आईना होता है। इसका समाज मे गहरी पैठ होता है। समाज का हर व्यक्ति पत्रकारों से काफी उम्मीद रखता है। पत्रकार रुपी दर्प ही जब कुरुप हो जाए तो उसमे दिखने वाला समाज का चेहरा कितना भयावह हो जाए गा इसका अन्दाजा स्वतः ही लगाया जा सकता है।
आज पत्रकारिता एक व्यवसाय के रुप फल फूल रहा है। जिन्हे कलम का सिपाही कहा जाता रहा है आज वही उसको बेचने में लगे हुए है लेकिन इस मर्यादित पेशे को बाजारू बना पाना उनके बस का नहीं है.